इलाहाबाद गैंगवॉर पर बनी Rajkummar Rao की ‘Maalik’ – क्या ये ‘पुष्पा’ जैसी हिट साबित होगी या सिर्फ एक और खिंचती हुई गैंगस्टर फिल्म?
अभी हाल ही में एक फिल्म रिलीज़ हुई है जिसे कुछ लोग फहाद फाजिल की मलयालम फिल्म का रीमेक मान रहे हैं. हालाँकि, दोनों फिल्मों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं है. ये नई फिल्म हल्की-फुल्की इलाहाबाद के असली गैंग वॉर से इंस्पायर्ड है, जिसमें एक जाना-पहचाना चेहरा भी शामिल था (समझ गए न कौन). अब अगर इन पर फिल्म बनेगी तो कांड होना तो तय है!
Maalik Movie: 150 मिनट का खून-खराबे वाला सिनेमा

ये फिल्म पूरे 150 मिनट की है और यकीन मानिए, इसमें कम से कम 150 गोलियां तो चली ही होंगी. ये पूरी तरह से खून-खराबे वाला सिनेमा है, जिसे परिवार के साथ देखने की कोई ज़रूरत नहीं है. लेकिन अकेले… आगे बताती हूँ.
सांप-सीढ़ी का खेल, लेकिन सांप नहीं, पुलिस ऑफिसर है!
फिल्म की कहानी एक सांप-सीढ़ी के गेम जैसी है, जहाँ आप आख़िरी तक पहुँच भी जाओ तो खतरा होता है. वो 99 वाला सांप डस ले तो गेम ज़ीरो पर आ जाता है. इस फिल्म में सांप तो नहीं है, लेकिन एक मशहूर पुलिस ऑफिसर है जो इसलिए मशहूर है क्योंकि वो 98 एनकाउंटर कर चुका है और 99वें पर डसने के लिए तैयार है. उसे ख़ास तौर पर सेंचुरी पूरी करने के लिए बुलाया गया है. शिकार करना है “मालिक” का, जिसका नाम भी उससे ज़्यादा ताकतवर है.
Maalik का जन्म और उसका एक सपना

बचपन की बात है, शहर के सबसे बड़े गुंडे को, जिससे हर कोई डरता था, उसे शहर के बीचों-बीच बांधकर दिवाली की लड़ियों से सजाकर फूंक दिया गया और पीछे शिवजी का डमरू बज रहा था. इसी शोर से “मालिक” पैदा हुआ है, जिसका ज़िन्दगी में बस एक सपना है – फैमिली मैन बनने का. “सर पर लाल बत्ती और हाथों में बीवी गर्भवती. हम दो हमारा एक.”
लेकिन अंडरवर्ल्ड का जंगल है तो जानवर भी बहुत सारे होंगे. भले ही शेर राजा क्यों न हो, लेकिन अगर सारे जानवर मिल जाएँ तो क्या अकेला राजा अपनी कुर्सी बचा पाएगा?
धोखे और अहंकार की कहानी
ये फिल्म खून-खराबे, बदले, बेइज़्ज़ती, अहंकार, घमंड, पाप, पुण्य और धोखे की कहानी है. इसमें समझ नहीं आएगा कि फिल्म के हीरो को हीरो कहें या विलेन. आप कहेंगे इसमें अलग क्या है? ये तो हर दूसरी गैंगस्टर वाली फिल्मों की कहानी जैसी लगती है.
अलग है फिल्म की एंडिंग, जो “मालिक पार्ट टू” की तरफ इशारा करती है. लेकिन वहाँ तक बैठ पाना काफी मुश्किल होगा दोस्तों, क्योंकि ये फिल्म एक बार शुरू होती है तो खत्म होने का नाम ही नहीं लेती, रबर जैसी खिंचती जाती है.
पुष्पा से मिलती-जुलती कहानी, पर अंदाज़ अलग
दिलचस्प बात ये है कि “पुष्पा” के राज और “मालिक” के राज में काफी समानताएं हैं. दोनों की कहानी एक-दूसरे की जुड़वाँ जैसी लगती है. वहाँ भी पुलिस बीच में आ गई थी, यहाँ भी पुलिस ने टांग अड़ा दी है. वहाँ भी जंगली लौंडिया थी, यहाँ भी जंगली जानवर हैं. और वहाँ श्रीवल्ली थी तो यहाँ मिस वर्ल्ड मानुषी हैं.
लेकिन अंतर है फिल्म बनाने के तरीके का. एक के 3 घंटे भी 2 घंटे जैसे लगते हैं तो दूसरे के 2 घंटे भी 3 घंटे से लंबे महसूस होते हैं.
कमज़ोरियाँ और कुछ अच्छी बातें
हुमा कुरैशी का कमबैक अच्छा लगा, लेकिन आइटम सॉन्ग डालकर फिल्म की कहानी को ब्रेक लगाने की क्या ज़रूरत थी? चल रहा था न राजनीति और वायलेंस, बस चलने देते.
जैसे पुष्पा में फहाद फाजिल जैसे एक्टर का उतना सही से इस्तेमाल नहीं हुआ, ठीक वैसे ही कमाल के बंगाली एक्टर को गर्म करके ठंडा ही छोड़ दिया. अरे, “मालिक” “मालिक” जैसा तब ज़्यादा लगेगा न जब वो खुद के बराबर के “मालिक” से भिड़ेगा. ये क्या, अंधाधुंध नौकरों को मार के फिल्म को निपटा दिया?
वैसे हाँ, एक खतरनाक सा सीन है फिल्म में यार, जिसमें राजकुमार राव को देखकर डर लग रहा था. डिस्टर्बिंग सा सीन है, इमोशनल भी है. कमज़ोर दिल वाले तो आँखें बंद कर लेंगे.
क्या ये फिल्म बॉलीवुड की “मालिक” बन पाएगी?
जो सबसे अच्छी बात लगी इस फिल्म की, वो है एक्टर्स का सेलेक्शन. “सीक्रेट गेम” वाले ईसा भाई से लेकर “जॉली-जॉली” खेलने वाले जज और “12th फेल” को पास कराने वाला जादूगर सब यहीं मिलेंगे.
लेकिन काश, जितने अच्छे एक्टर्स हैं, उतना अच्छे से इस्तेमाल होते तो सच में सिर्फ नाम से नहीं, कंटेंट से ये फिल्म बॉलीवुड की “मालिक” बन सकती थी.
मेरा फ़ैसला:
2.5 स्टार्स!
फ़्रैंकली, ये गुंडागर्दी वाली फिल्मों में अब ज़्यादा स्कोप बचा नहीं है. सब जानते हैं कैसे खत्म होंगी – “सबसे बड़ा गुंडा, वर्दी वाला गुंडा.” सेम फार्मूला इस फिल्म का भी है.
तो गुरु, पाँच में से “मालिक” को बस ढाई स्टार्स मिलेंगे.
पॉज़िटिव पॉइंट्स:
- राजकुमार राव का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस
- सपोर्टिंग एक्टर्स का ज़बरदस्त सेलेक्शन
- म्यूजिक जो थिएटर में मस्त बज रहा था
नेगेटिव पॉइंट्स:
- प्रेडिक्टेबल कहानी
- विलेन वाले कैरेक्टर्स का बच्चों जैसा इस्तेमाल
- फैमिली वाले एंगल में केमिस्ट्री का बायोलॉजी, जमा नहीं, उल्टा फिल्म लंबा कर दिया
- एक तरफ सुपरमैन, दूसरी तरफ मालिक. मुझसे पूछोगे तो फहाद फाजिल वाली “मालिक” घर पे देखना सबसे बेस्ट ऑप्शन होगा. वरना थिएटर में उड़ जाओ सुपरमैन के साथ!
FAQ Maalik Movie Review से जुड़े सवाल
Q1. क्या ‘Maalik’ फिल्म फहाद फाजिल की मलयालम फिल्म का रीमेक है?
Ans: नहीं, ‘Maalik’ फिल्म फहाद फाजिल की मलयालम फिल्म से प्रेरित नहीं है। यह इलाहाबाद की सच्ची गैंगवॉर घटनाओं से प्रेरित एक अलग कहानी है।
Q2. Maalik फिल्म की कहानी किस पर आधारित है?
Ans: फिल्म की कहानी इलाहाबाद के असली गैंगवॉर और एक कुख्यात पुलिस ऑफिसर के 98 एनकाउंटर वाले इतिहास से प्रेरित है।
Q3. क्या ‘Maalik’ फिल्म फैमिली के साथ देखने लायक है?
Ans: नहीं, यह फिल्म बेहद हिंसक और खून-खराबे से भरी है। परिवार के साथ देखना सही नहीं होगा।
Q4. क्या ‘Maalik’ फिल्म ‘Pushpa’ से मिलती-जुलती है?
Ans: कुछ कहानी के एलिमेंट्स जैसे पुलिस बनाम माफिया और जंगल जैसी सेटिंग मिलती-जुलती हैं, लेकिन फिल्म का ट्रीटमेंट और प्रभाव अलग है।
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