अगर आप इन दो चहेरों को नहीं पहचानते हो मान लो आप सिनेमा के बारे में कुछ नहीं जानते हो। ये दोनों एक्टर्स पूरी तरह जिम्मेदार हैं इंडियन सिनेमा को हॉरर, थ्रिलर,सस्पेंस इन सारे शब्दों का असली मतलब सिखाने के लिए ।


32 साल पहले जो सिनेमा बनाया उसने बॉलीवुड के कई एक्टर्स का करियर चलाया और आज तक पूरी दुनिया में कोई दोबारा इसके टक्कर की फिल्म नहीं बना पाया। मैंने बोला आज तक क्योंकि फिर से ये दोनों एक्टर्स एक साथ वापस लौट आए हैं। साथ में ऐसा सिनेमा लाए हैं जो सिनेमा शब्दा का मतलब बदल देगा। मलयालम सिनेमा और सस्पेंस,थ्रिलर्स इससे ज्यादा परफेक्ट कोई जोड़ी हो नहीं सकती। कुछ टाइम पहले इतनी बेस्ट मूवीस देखी थी और अब उन सबका बाप सिनेमा आया है। जैसे एक मैजिक ट्रिक होती है ना जिसको हजारों लोगों के सामने किया जाता है।

फिर भी उसके पीछे का सच कोई कभी पकड़ नहीं पाता है। सिर्फ उस ट्रिक को करने वाला उसका सच बता सकता है। ठीक वैसी ही है ये फिल्म। आप देखते जओगे शॉक्ड रह जाओगे और जब एडिंग आएगी सीटियां तालियां बजाओगे। वैसे शायद बहुत कम लोग जानते होगें। अजय देवगन वाली दृृश्यम । वो फिल्में मोहन लाल सर की ओरिजिनल फिल्म की हिंदी रिमेक थी और ज्यादा चौंकना मत अगर इस नई वाली फिल्म को भी रिमेक कर दिया जाए। थोड़ रम इसको मोहन लाल सर का कमबैक सिनेमा बोला जा रहा है क्योंकि कुछ हफ्ते पहले एम पुरान से जो एक्सपेक्टेशंस थी लोगों की वो यह फिल्म मैच नहीं कर पाई थी। बॉक्स ऑफिस रिकॉर्डस बहुत सारे बना दिए थे लेकिन कटेंट के मामले में फिल्म एवरेज रह गई थी लेकिन सारी शिकायत दूर हो जाएगी जब एक बार थुडारम से मुलाकत हाे जाएगी।
थुडारम की स्टोरी क्या हैं
सरल शब्दों में बोलना है तो यह फिल्म कुछ और नहीं दृश्यम का ही एक पैरेलल अल्टरनेट वर्जन बोल सकते हो जिसमें फैमली है सस्पेंस है, मौत है और सबसे इंटरेस्टिंग बदला रिवेंज है। बहुत टाइम बात ऐसी फिल्म देखी है मैंने जिसमें खूब सारा दिमाग लगा लिया। फिर भी फिल्म के क्लाइमेक्स ने झटका दे दिया। एक दम अनप्रिडिक्टेबल सिनेमा जो आपके होश उड़ा देगा। अगर जानना है ना स्टाेरी टेलिंग किसको बोलते हैं तो थोडम से बेस्ट एग्जांपल कोई दूसरा नहीं होगा। रोड के टेढ़े-मेढ़े डिजाइन से यह लोग फिल्म की थीम समझा रहे है। जंगल में सांप चला के अपनी कहानी के नेगेटिव कैरेक्टर्स को दिखा रहे हैं और उसी जंगल में रहने वाले हाथी के परिवार से फिल्म के लीड एक्टर्स को दिखा रहे हैं। दिमाग लगा के बनाई गई फिल्म है जिसको अगर एंजॉय करना है तो थोड़ा नहीं पूरा का पूरा दिमाग आपको भी चलाना पड़ेगा। शर्त मंंजूर है तो आगे कहानी सुन लो। एक नॉर्मल सा टैक्सी ड्राइवर उतना भी मामूली नहीं है जितना लोग सोच रहे है।

वह चलाता है एक विंटेज एंबेसडर कार जिसका प्राइस आप सोच भी नहीं सकते । लेकिन इससे ज्यादा इंटरेस्टिंग खुद इस ड्राइवर का पास्ट है जो किसी टाइम फिल्म इंडस्ट्री का फेमस स्टंट मैन फाइटर हुआ करता था। ममूटी,कमलहसन इन सबके सामने लड़ा करता था। तो फिर एक्टिंग से सीधा टैक्सी क्यों? इसका जवाब इस चेहरे में छुपा है। जिसकी बैक स्टोरी आपको खुद थिएटर में जाकर पता लगानी पड़गी। मैं नहीं बता सकती। फिलहाल जो मैं आपकों बताऊंगी उसको थोड़ा एक्स्ट्रा ध्यान से सुनना। कांतारा देखी है कितने सारे लोग एक साथ मिलकर भगवान के फेस्टिवल को सेलिब्रेट करते हैं जैसे मानो रोंगटे खड़े हो जाते है। सेम कुछ वैसा ही शहर के बाहर एक काले जंगल में रात को हो रहा है और इस जंगल के बीचों बीच उसी ड्राइवर की विंटेज टैक्सी कार चुपचाप चली जा रही है।
कमाल की बात यह है उस वक्त इस गाड़ी में एक ड्राइवर और तीन पुलिस वाले बैठे हैऔर एक पांचवा कैरेक्टर भी है जो गाड़ी की डिग्गी में बंद किया गया है। थुडारम की कहानी एक्चुअली में उसी पांचवे कैरेक्टर के बारे में है जो आपके सामने होकर भी आप उसको देख नहीं पाओंगे। जब तक फिल्म वाले नहीं चाहेंगे आप कुछ समझ नहीं पाओगे। मैजिक ट्रिक की बात की थी ना मैंने जैसे मेन जादू करने से पहले जादूगर आपका ध्यान हटाने के लिए बहुत सारे ट्रिक्स खेलता है। वैसे ही इस फिल्म की कहानी बहुत बड़ी धोखेबाज है।
आपको इधर-उधर फंसा के फिल्म अचानक से पूरी तरह बदल जाती है। मतलब सिर्फ एक सीन आएगा और अच्छा खासा फैमिली ड्रामा सीधा जिंदगी मौत का सस्पेंस, थ्रिलर बन जाएगा। फैमिली टू एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी यह वाली कैटेगरी मेरी फेवरेट है सिनेमा में और थुडारम इतने अच्छे से ह्यूमन इमोंशस का इस्तेमाल करके कहानी चलाती है कि आप कंफ्यूज हो जओगे दिमाग लगाना है या दिल से सोचना है स्पेशली इंटरवॉल पे जिस तरीके से फिल्म नॉर्मल से स्पेशल बन जाती है वहां कांतारा जैसे सिन्स हैं और दृश्यम जैसा भयंकर टविस्ट लिटरली गूसबम्स फील करोगे। एक कार थ्रिलर देखने वाले हो आप मतलब 90 परसेंट इस फिल्म की कहानी उसी कार के बारे में है और कैसे इससे जोड़ के एक रात की पूरी कहानी दिखाई है। स्टोरी राइटिंग इसको बोलते हैं। देखा है आपने आजकल एक्टर्स एक्शन करना चाहते हैं। खुद को ट्रांसफार्म करके पब्लिक को पटाना चाहते है। लेकिन ध्यान से देख लो।
रियल सुपरस्टार ऐसा दिखता है बॉस। ना कोई फालतू सिक्स पैक एब्स ना ही खुद की तारीफ करने वाले डायलॉग्स ओनली दमदार परफॉर्मेंस। मोहन लाल सर कीआंखों का अलग सा फैन बेस होना चाहिए। यह फिल्म उसका परफेक्ट एग्जांपल है। और हां, दृश्यम की तरह यहां सिर्फ दिमाग से खेल नहीं होगा। फिल्म के सेंकेड हाफ में अच्छा खासा मास प्रेजेंटेशन भी दिखाया है। जिसमें मोहन लाल सर के स्टंट मैन वाले पास्ट ने खूब तोडफोड़ मचाया है। लेकिन ऑनेस्टली इस फिल्म का एक्स फैक्टर मोहन लाल सर नहीं है जो इनके ऑपोजिट खड़े हैं वो अभी से 2025 के विलेन ऑफ द ईयर बन चुके हैं। बाप रे बाप जिस तरीके से नेगेटिव कैरेक्टर्स का नैरेटिव बदलता है । थिएटर में बैठा हर इंसान स्पीचलेस हो जाता है। क्या परफॉर्मेंस दिया है। जिसने बोला था सच बोला था सिनेमा वही परफेक्ट होता है। जिसमें हीरो के सामने टक्कर का विलेन खड़ा होता है। इसमें मोहनलाल शेर हैं तो नेगेटिव एक्टर सवा शेर हैं।

जो फेस ऑफ है इन लोगों का वो लिटरली 2025 का बेस्ट थिएटर एक्सपीरियंस बनने वाला है। वहां एक्शन , इमोशन है और एक दिमाग फाड़ने वाला सस्पेंस छुपा है। ऑनेस्टली मुझे नहीं लगता बॉलीवुड में फिलहाल कोई ऐसा एक्टर या डायरेक्टर होगा जो इस तरीके की फिल्म जैसा आईडिया क्रैक कर लेगा। लेकिन इसका पॉजिटिव ले सकते हैं और ऐसी फिल्म देखकर अंधाधुंध तुम जैसे टाइम में वापस लौट सकते है।
पांच में से 4 स्टार मिलने वाले हैं
इस मलयालम मास्टर फीस फिल्म को जिसके एंड होने के बाद भी दोबारा टिकट खरीद के फिर से देखने का मन करने लगता है।
पहला स्मार्ट नरेशन कहानी सिर्फ बताना नहीं उसको फील कराना।
दूसरा कमाल का सस्पेंस, बहुत सारे डिस्ट्रैक्शन वाले टविस्ट और एक माइंड ब्लोइंग क्लाइमेक्स।
तीसरा एक्टिंंग परफेंससेस मतलब टोटली परफेक्ट कास्टिंंग। हर एक एक्टर अपने रोल के लिए बनाया गया था।
और चौथा इन सबके इमोशंस जो स्टारी का इंपैक्ट डबल कर देते हैं। और एक्स्ट्रा हाफ स्टार वो मोहन लाल सर का का मास एक्शन अवतार टोटली आउट ऑफ सिलेबस आया जिसने थिएटर एक्सपीरियंस को वाइल्ड फॉयर बनाया। नेगेटिव्स में बस ये थोड़ा सा फील हुआ मुझे कि जैसा फर्स्ट हाफ में स्टोरी टेलिंग पे फोकस था वो सेंकड हाफ में थोड़ा सा लूज हो गया। जैसे वो कांतारा टाइप का सीन वैसा और डाला जाना चाहिए था।
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